दिल्ली एकबार फिर शर्मसार हुई

दिल्ली एकबार फिर शर्मसार हुई

एक बार फिर मुफ़्तखोरी जीत गई और देश और हिन्दुत्व फिर हार गया
लोभ और लालच इन्सान को अंधा कर गये
खुली आँखों से तुम्हें अंधा कर गये
मुफ़्त बीजली पानी को लेकर मुफ़्त में तुमने अपनी आत्मा को बैच दिया
अरे ओ हिंदूओ आँखों के अंधे भी जो ना करे वो अक्ल के अंधों ने कर दिया
ज़मीर तो ज़मीर आत्मा तक को बेच दिया
इन्सान हो और जिन्दा हो उस अहेसास को भी छोड़ दिया
मुफ़्त खोरों अपने लालच में अपने धर्म को ही छोड़ दिया
ए दिल्लीवालों शर्म करो तुमने लोभी हो कर अपने फ़र्ज़ को ही भुला दिया
मुफ़्त में तो पाप भी नहीं मिलता और तुमने मुफ़्त में अपने आप को ही बेच दिया
आज मस्तिष्क शर्म से झुक गया और हिन्दू धर्म शर्मसार हुआ
दिल्ली वालों एकबार फ़िर से कौरवों को जिताने एक शकुनी आ गया
एकबार फ़िर मुफ़्तखोरी जीत गई और
देश और हिन्दुत्व फिर हार गया
दिल्ली एकबार फ़िर शर्मसार हुई

प्रीति जागीरदार
11/2/2020

तुम जन्म से मुस्लिम हो सकते हो
पुरखों से मुस्लिम हो नहीं सकते
तुम्हारी चौथी या पांचवी पीढ़ी के नाम
जरूर हर हर महादेव बोलनेवाले होंगे
तुम शरीर से तो मुस्लिम हो सकते हो
पर आत्मा से मुस्लिम हो नहीं सकते
तुम बाहरी आचार से मुस्लिम हो सकते हो
पर जीवन के मुल विचार से मुस्लिम हो नहीं सकते
जिसका धर्म गले रेतने की धमकियों से बदला गया हो
वो इतना मज़हबी हो नहीं सकते
ऐसी कौन सी घुट्टी पिलाते हो मौलाओं
जो झूम्मे की नमाज़ के बाद मुस्लिम ये भूल जाते हैं की वो भी इन्सान है
जो छह साल के बच्चे का गला रेत दें
ऐसा ज़ालिम जिगर कहां से लाते हो
इतनी बेदर्दी से कोई जानवर को न मारे
तुम इन्सान को कैसे मार देते हो
ये कौनसी घुट्टी पिलाते हो मुल्लाओं
अच्छे भले इन्सान को दानव बना देते हो
आम मुस्लिम समुदाय में जिस ज़हर को घोलते हो
वो तुम्हारी कॉम को ही ख़त्म कर देगा
ज़हर तो ज़हर ही है और साँप तो साँप ही है
आज नहीं तो कल ये तुम्हें भी डंस ही लेगा
तुम महादेव तो हो नहीं जो साँप को धारण करे
ज़हर को भी गले में अटका ले और फ़िर भी ज़िन्दा रहे
तुम जन्म से तो मुस्लिम हो सकते हो
पर पुरखों से मुस्लिम हो नहीं सकते
तुम अल्ला हो अक़बर की चीखें हो सकते हो
हर हर महादेव की गूंज हो नहीं सकते
क्योंकि इस गूंज के बाद दान दिया जाता है
ये गूंज कुछ बचाने को उठती हैं और दान में वो अपने प्राण भी देती हैं
तुम जन्म से तो मुस्लिम हो सकते हो
पर पुरखों से मुस्लिम हो नहीं सकते
तो फ़िर क्यों तुले हो अपने ही पुरखों को मिटाने
क्यों अपनी ही जड़ों को हो काटते
तुम वही रहो जो तुम जन्म से हो
पर अपने पुरखों की जड़ों को मत काटो
क्योंकि अगर यह पेड़ गिरा तो तुम्हारा भी बहुत कुछ खो दोगे
तुम अपना जीवन तो जिओगे पर आत्मा ही खो दोगे
तुम जन्म से मुस्लिम हो सकते हो
पुरखों से मुस्लिम तुम हो नहीं सकते!!

प्रीति जागीरदार

तुम सोचो

तुम सोचो

तुम सोचो हिंदूओ तुम कहां तक थे और आज कहां तक सिमट कर रह गए हों
तुम हजार वर्ष पहले ईरान इराक़ अफगानिस्तान से लेकर बर्मा तक थे
कश्मीर से लेकर श्रीलंका तक थे
तुम सोचो कल कहां तक थे और आज कहां तक हो
पूरब में बर्मा से भी आगे मलेशिया इन्डोनेशिया तक तुम रहते थे
फ़िर धीरे धीरे मध्य एशिया से एक तूफां उठा जो फैलता ही गया
तुम सोचो तुम सनातनी कहां तक फैले थे और आज कहां तक हो
तुम सोचो…

हे हिंदूओ तुम सोचो क्यों तुम सिमटते गए हो
तुम्हारी हज़ारो वर्ष पुरानी सनातनी संस्कृति क्यों नहीं टिक पाई उस तूफ़ान में
तुम सोचो तो समझ में आएगा एक ही कमजोरी ने तुम्हें हरा दिया
एकजुट ना होने से ही तूफ़ान को रोक नहीं पाए
तुम सोचो तुम कहां कहां तक थे और आज कहां तक सिमट गए हो
तुम सोचो…

देवों को अक्सर दानवों से हारते सुना है
और अक्सर विष्णु या शिवजी को देवों को बचाते हुए सुना है
पर आज इस कलयुग में वो तो नहीं आयेंगे पर हाँ अपने दूत के रूप में मोदी शाह को भेज दिया है
पर हिंदूओ अब तो एकजुट हो जाओ तो ही तुम बचोगे और तुम्हारी नस्लें बचेंगी
तुम सोचो…

धरातल में जहां तक फैले थे उससे आधे में भी अब नहीं रहे हो
अब तो जागो ओ हिंदूओ और एकजुट हो जाओ ओ बिंदुओं
तुम अब तो सोचो कहां तक तुम थे और कहां तक सिमट कर रह गए हो
तुम सोचो और अब तो उठो अपने अंदर के स्वार्थ को दूर हटाओ
डमडम डमडम डमरू बजाओ
अब तो तुम तांडव दिखाओ और इस तूफ़ान को भगाओ
अब तांडव के बिना नहीं चलेगा अब तो मिटा दो या मीट जाओ
यही तुम्हारा भाग्य है और इसको ही तुम हकीक़त बनाओ
तुम्हें कसम है इस धरती की अब तो अपना वज़ूद बचाओ
तुम सोचो कहां तक फैले थे तुम और कहां तक सिमट कर रह गए हो!!!
तुम सोचो…

प्रीति जागीरदार

ये नंगे नाच तलवारों के

ये नंगे नाच जो तलवारों के चल रहे हैं
हरे झंडों के संग जो दौड़ रहे हैं
अपना अल्ला ओ अक़बर चीख रहे हैं
ये क्या CAA का विरोध कर रहे हैं?
ये तो नासमझ गवारों की टोली है
वो खुद तो नहीं समझते और दूसरों
को भी समझने नहीं दे रहे हैं
जो खुले आम हमें डरा धमका रहे हैं
पर ये सभी भूल गए हैं कि हम भी हिन्दू है
और तलवारों के नंगे नाच हमने भी खूब देखे हैं
अरे देखे क्या तलवारों से हम भी तो खेले है
भगवा झंडा फहराने को हम भी तो खड़े है
हर हर महादेव पुकारते हम भी तो अड़े हुए हैं
हमारे भगवा झंडे में हरा शामिल जैसे किया है
वैसे ही उसे मिटा भी सकते हैं
हमारी उदारता को तुम कमज़ोरी समझते हैं
तो याद रख जो जिंदा रख सकते हैं वो मार भी सकते हैं
ऐसे नंगी तलवारों के नाच हमने बहोत देखे है
इससे हमें ना डराओ ओ जालिमों
हर हर महादेव की गूँज अगर उठ गई
तो पूंछ दबा कर भागोगे
क्योंकि हम भी खड़े है और अड़े है
ऐसे नंगे नाच तलवारों के हमने भी बहोत देखे हैं

प्रीति जागीरदार

हम हिन्दू है हम बिंदु है
हम पूरे धरातल में फैले हैं
युग युग से भगवा पहने है
हम सिंधु से हिंदू तक और
अटक से कटक तक रहते हैं
सदियों से हमलावरों से लड़ते हैं
और आज भी वही पर अटके है
अपने ही जयचंदों के वार से घायल है
पर अब तो जागो ओ हिंदूओ
अब तो एक हो जाओ बिंदुओं
जब तक बूंद बूंद में बंटोगे
तब तक पेले जाओगे
बूंद बूंद जोड़कर हिन्द बनाओ
अरे ओ अक्ल के अन्धों अब तो
नींद से जाग जाओ
अब तो अपने भाग्य सजाओ
वीर नहीं गर बन सकते तो
तीर ही बनकर दिखला दो
अर्जुन के साधे तीर की तुम
दिशा ही बनकर दिखला दो
एक तीर से दो चार निशान ताकते दिवानों की ताकत ही बनकर दिखला दो
अंजाम ना सही कहानी का पर आगाज़ बनकर तो दिखला दो
मरियल सी लम्बी जिन्दगी में
कुछ लम्हें तो खुलकर जी जाओ
स्वार्थ के ग़हरे कुए से अब तो बाहर आ जाओ
अपनी और अपने बच्चों की चोटी तो बचा जाओ
हे सौ करोड़ हिंदूओ अपने आप को तो बचा जाओ!
दुहाई है तुम्हें अपनी मातृभूमि की
उसकी लाज तो बचा जाओ
किसी और की नज़र में ना सही
अपनी नज़र में तो उपर उठ जाओ
कलंक ले कर मरने के बदले
भाल पे तिलक ले कर मर जाओ
ज्यादा कुछ नहीं तो वीरगाथा ही बन
जाओ

प्रीति जागीरदार

हिन्दू हृदय सम्राट

हिन्दू हृदय सम्राट

भारत माँ कबसे तैयार खड़ी थी
आंख में आँसू लिए बाहों को फैलाए
कब मेरे बच्चे जो मुझे पुकारते हैं
रोते बिलखते मेरे पास आते हैं
कब में उन्हें गले लगाऊंगी
पर भारत माँ के किसी लाल में ऐसी हिम्मत नहीं ना ही हौसला है
जो अपने उन गरीब मजबूर भाई बहनों को उनके अपने देश में पनाह दें
उन सताये हुए हिन्दू लोगों की कई पीढ़ियां टूट गई या तो मर गई या हार के धर्म ही बदल लिया
कोई नेता ना उनके दर्द को समझा ना ही उनका राहबर बना
बिलखते बीखरते हिन्दू पड़ोसी देशों में पचीस प्रतिशत से घटते घटते दो प्रतिशत हो गए
पर नाहीं कभी कोई कांग्रेसीने पूछा नाहीं किसी और ने पूछा
पर आज अचानक मेरे भारत का भाग्य जागा है
भारत माँ के आंसू पोंछने एक नहीं दो दो सपूत आए हैं
ईन टूटते जुझते हिंदूओ को अपनाने बेटे नहीं बाप आए हैं
भारत माँ कबसे तैयार खड़ी थीं पर अब जाके मोदी और शाह नामक बाप आए हैं
घर के दरवाजे अक्सर माँ खोलती है पर घर में आने की इजाज़त सिर्फ़ बाप देता है
मुझे गर्व है कि हमने आज ईन सूअरों के असली बाप पाए हैं
भेड़ों से भरी इस भीड़ में दो शेरों ने हाहाकार मचाया है
आज भारत माँ के आंसू पोंछने उसके जांबाज़ बेटे आए हैं
भगवा पताका फ़हराने माँ के लाल आए हैं
हजारों सालों के बाद एक नहीं दो दो असली हिन्दू हृदय सम्राट आए हैं!

प्रीति जागीरदार
दिसम्बर 11 2019

ए महबूब तेरे तकल्लुफ से क्या होगा
बेतकल्लुफी मेरी आदतों में शामिल हैं

ए गम मुझे सताने से क्या होगा
ग़मों को पी जाना मेरी आदतों में शामिल हैं

ए बेहयायी मुझे आजमाने से क्या होगा
हयां मेरी आदतों में शामिल हैं

ए इश्क मुझे तडपाने से क्या होगा
इंतजार मेरी आदतों में शामिल हैं

ए ज़िन्दगी तेरी नाराज़गी से क्या होगा
मुस्कुराना मेरी आदतों में शामिल हैं।

प्रीति जागीरदार